Monday, May 25, 2020
Friday, May 15, 2020
Thursday, May 14, 2020
Wednesday, May 13, 2020
Tuesday, May 12, 2020
कोरोना का प्रभाव
कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में जो परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई हैं और महा संकट के जो बादल छाए हैं, उसके टलने का निकट भविष्य में कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।
संकट टलने के पश्चात भी पूरी दुनिया पर इसका जो दुष्प्रभाव पड़ेगा, वह भी बड़ा भयावह होगा! यह कोई डराने वाली बात नहीं है, वरन यह एक कटु सत्य है।
जब किसी राष्ट्र पर संकट आता है, तो प्रत्येक नागरिक उससे प्रभावित होता ही है, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो। ‘वह प्रभाव क्या होगा?’ इस बारे में हम ठीक तरह से अनुमान भी नहीं लगा सकते!
फिलहाल हमारे पास हर क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी बरतने के अलावा कोई चारा नहीं है, जैसे; स्वास्थ्य, स्वच्छता, शुद्धता के साथ आर्थिक, पारिवारिक, सामाजिक मामलों में विशेष सावधानी बरतना।
हमें मितव्ययिता बरतनी पड़ेगी।
जो परिस्थिति निर्मित हुई है और जो होने वाली है, उससे अप्रभावित रहने के लिए हमें अतिरिक्त मानसिक तैयारी की भी आवश्यकता है।
इसके लिए योगासन, प्राणायाम, प्रातः भ्रमण करना होगा। सन्तुलित भोजन व अच्छी निद्रा लेते हुए व्यसनों से बचना होगा। ध्यान-साधना, स्तुति-प्रार्थना, सत्संग, आध्यात्मिक ग्रन्थों का पाठन, चिन्तन, प्रभु-सुमिरन, हवन–यज्ञ जैसे दूसरे उपाय हैं, इनसे भी लाभ लेना होगा।
हम सबको नि:स्वार्थ भाव से मानव सेवा करनी होगी। प्रेम, दया-करुणा के मार्ग पर चलकर ही यह संभव है।
मीडिया में फैलायी जा रही जातीय–धार्मिक–क्षेत्रीय–भाषागत–वर्गगत–लैंगिक असमानता को नकारकर नफ़रत के सौदागरों की दुकानें बंद करनी होंगी!
यदि हम सृष्टि द्वारा दिये गए संकेत को समझने में सफ़ल होते हैं, तो यह मान कर चलें कि एक सुनहरा भविष्य हमारा इंतज़ार कर रहा है!
Monday, May 11, 2020
ईर्ष्या भाव का परिणाम
जिस प्रकार अग्नि सूखे पत्तों को प्रज्वलित कर ख़ाक में परिवर्तित कर देती है, उसी प्रकार ईर्ष्या भाव मनुष्य को सम्पूर्ण रूप से नष्ट कर देती है ।
Sunday, May 10, 2020
केवल सबका हित का विचार करें
यदि हम किसी को बरबाद करने की ठान रखे हैं, तो ऐसा इरादा तत्काल त्याग दीजिये, क्योंकि किसी को आबाद या बरबाद करना प्रभु एवं काल के हाथ में है । ऐसा इरादा हमारा सर्वनाश कर देगा, उसका तो कुछ नहीं होगा ।
Saturday, May 9, 2020
व्यसन
किसी भी प्रकार का छोटा से छोटा व्यसन भी घातक परिणाम देता है, चिन्तन करते हुए हर प्रकार के व्यसन से बचना चाहिए ।
Friday, May 8, 2020
Tuesday, May 5, 2020
Saturday, May 2, 2020
मानव जीवन में सदगुरू की महत्ता
हम सदगुरु के शिष्य, सदगुरु की महानता एवं हमारे जीवन में उनके महत्व से भलीभाँति वाकिफ़ हो गए हैं । हम जान गए हैं कि सदगुरु की कृपा से ही हमारा सर्वांगीण विकास सम्भव है । हम जानते हैं कि सदगुरु की प्रसन्नता में ही हमारा कल्याण है । हम यह भी मानते हैं कि हमारी समस्याओं, उलझनों, रोगों का निदान सदगुरु दया से सम्भव है । हम यह चाहते हैं कि सदगुरु हमसे प्रसन्न रहें, हम पर सदैव सदगुरु कृपा की बारिश होती रहे, सदगुरु की दया दृष्टि हम पर बराबर बनी रहे । हम सदगुरु से स्वयं के लिए बहुत कुछ चाहते हैं, परन्तु हम स्वयं के कर्त्तव्य के प्रति पूर्ण रूप से उदासीन हैं, विशेषकर "साधना(ध्यान)" के विषय में । हमें यह मानना पड़ेगा कि जितना समय हमें साधना में देना चाहिए, उतना समय हम नहीं दे रहे हैं एवं जितनी नियमित हमारी साधना होनी चाहिए, उतनी नियमित नहीं है । जिस प्रकार सन्सार के प्रत्येक कर्त्तव्य को हम अपना 100% देकर निभाते हैं, वही भाव हमारा साधना के प्रति भी होना चाहिए ।
हमारी साधना नियमित रूप से होने लगे, अधिक समय तक हम साधना में बैठने में सक्षम हो सकें, साधना में हमारी उत्तरोत्तर प्रगति हो, साधनात्मक अनुभव हमें होने लगे, हमारा आध्यात्मिक विकास हो, हम एक सच्चे इन्सान बन सकें, हमारी आदतें– विचार– व्यवहार– कर्म आदर्श हों, हमारा व्यक्तित्व प्रभावशाली हो, प्रेम– करुणा– दया– क्षमा– अहिंसा– सहायता ---------- आदि गुणों को हम धारण कर सकें, सांसारिक रिश्तों को हम पूर्ण निष्ठा से निभा सकें, हम हर हमेशा ऊर्जावान रह सकें, हमारे जीवन में उत्साह– उल्लास– उमंग– उत्तेजना का समावेश हो । हम निरोगी एवं दीर्घजीवी हों.....................
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