Tuesday, March 24, 2020

भाव की शुद्धता

यदि हम अपने हॄदय में किसी अन्य व्यक्ति के प्रति द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध, हिंसा-------का भाव पाल कर रखे हैं, तो वे भाव हमें ही दीमक जैसा चाट जायेंगे, और एक दिन हमारे सर्वनाश का कारण बनेंगे ।

Friday, March 20, 2020

सकारत्मकता


जीवन में जब हम सकारात्मक विचार लेकर चलते है, तो विपरीत परिस्थितियां भी अनुकूल होने लगती हैं ।

Thursday, March 19, 2020

जीवन में जीवन्तता

मानव जीवन में जीवन्तता तभी है, जब जीवन में उत्साह, उल्लास, उमंग, उत्तेजना का  समावेश हो !

Wednesday, March 18, 2020

मानव जीवन की समस्याएँ

मानव जीवन की समस्त समस्याओं का एकमात्र हल सदगुरु शरण में  है ।

जीवन की सार्थकता

आत्मा को मनुष्य देह का प्राप्त होना, अत्यन्त दुर्लभ है, कितने ही युग–कल्प व्यतीत होने के पश्चात प्रभु की अहेतुकी कृपा से यह सौभाग्य प्राप्त होता है । इससे अधिक दुर्लभ है–सदगुरु का मिलना । सदगुरु के मिलने के पश्चात दुर्लभ है–सदगुरु की सेवा का अवसर प्राप्त होना । अतः जब भी सेवा का परम दुर्लभ अवसर प्राप्त हो, उस अवसर से किसी भी स्थिति–परिस्थिति में नहीं चूकना चाहिए । सेवा ही भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और भक्ति सर्व प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है ।

Tuesday, March 17, 2020

मानव जीवन

मानव जीवन में यदि पाने की इच्छा एवं खोने का डर समाप्त हो जावे तो, तब जीवन का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है ।

Sunday, August 25, 2019

स्वर्वेद:विश्व का अद्वितीय आध्यात्मिक सद्ग्रन्थ

*स्वर्वेद* मानव जाति के उत्थान का आध्यात्मिक सद्ग्रन्थ है । इसके शब्द शब्द में अदभुत चमत्कार भरा हुआ है । *स्वर्वेद*  की वाणी अमोघ है । ये वाणी साक्षात्कृतधर्मा ऋषि की वाणी है, ब्रह्मवाणी है, दिव्यवाणी है, अमृतवाणी है । इसके श्रवण मात्र से शुभ संस्कारों का उदय होता है, अशुभ संस्कार नष्ट होते हैं । विवेक जागृत रहता है । अविद्या, अहंकार नष्ट होता है, जिससे आध्यात्मिक ज्ञान का विमल प्रकाश प्राप्त होता है । *स्वर्वेद*  में सेवा, सत्संग एवं साधना की त्रिवेणी है । ज्ञान, वैराग्य, भक्ति का यथार्थ है । *स्वर्वेद*  के यथार्थ ज्ञान से ही अविद्या-अज्ञानता नष्ट हो सकती है, ब्रह्मविद्या की ज्योति प्रकाशित हो सकती है, क्योंकि *स्वर्वेद*  की विषयवस्तु ब्रह्मविद्या ही है । ब्रह्मविद्या विहंगम योग का व्यापक प्रचार हो इसलिए इसके प्रणेता अनन्त श्री सदगुरू महर्षि सदाफलदेव जी भगवान ने इस महान सद्ग्रन्थ का सृजन किया है ।
–पूज्य सद्गुरु उत्तराधिकारी श्री विज्ञानदेव जी महाराज ।