Wednesday, April 21, 2021

अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप

🙏एक विनम्र प्रार्थना

मित्रों! यह मानव जीवन अनमोल है । हम किसी भी जाति, धर्म(सम्प्रदाय), वर्ग, भाषा, क्षेत्र.......से सम्बन्धित हों, हमारी आराधना पद्धति विभिन्न्न हो, हमारी साधना पद्धति भले ही विभिन्न हो ।
ज्ञान का कोई अन्त नहीं है । यह भाव उचित नहीं है कि जितना हम जान गए हैं, वह पर्याप्त है, अब कुछ जानने की आवश्यकता नहीं है । यह भाव भी उचित नहीं है कि जो भी हम जान गए हैं, वह ही सत्य है । आद्यात्म में बड़े रहस्य हैं । यह अनुभव का विषय है । इसे पढ़कर या सुनकर नहीं जाना जा सकता है । अभी तक हमने जो भी जाना है,  वह मन और बुद्धि के आधार पर जाना है । अध्यात्म तो आत्मा का विषय है । हम जब मन एवं प्राण से उपरम हो जाते हैं, तब आत्मा का प्रत्यक्ष अनुभव होता है, तब हमें आत्मा का आधार प्राप्त होता है । जब आत्मा का आधार प्राप्त हो जाता है, तब अध्यात्म घटित होने लगता है । तभी वास्तविक स्वरूप में भक्ति, आराधना, प्रार्थना, उपासना, पूजा, भजन,........प्रारम्भ होता है । तब तक हम मात्र कल्पना में जी रहे हैं, प्रसन्न हो रहे हैं, तृप्त हो रहे हैं, सन्तुष्ट हो रहे हैं । मानव जीवन में जिज्ञासा की परम् आवश्यकता है । जिज्ञासा का अभाव नहीं होना चाहिए । ..........शेष फिर कभी..........
दिनेश राव
21042021