Sunday, August 25, 2019

स्वर्वेद:विश्व का अद्वितीय आध्यात्मिक सद्ग्रन्थ

*स्वर्वेद* मानव जाति के उत्थान का आध्यात्मिक सद्ग्रन्थ है । इसके शब्द शब्द में अदभुत चमत्कार भरा हुआ है । *स्वर्वेद*  की वाणी अमोघ है । ये वाणी साक्षात्कृतधर्मा ऋषि की वाणी है, ब्रह्मवाणी है, दिव्यवाणी है, अमृतवाणी है । इसके श्रवण मात्र से शुभ संस्कारों का उदय होता है, अशुभ संस्कार नष्ट होते हैं । विवेक जागृत रहता है । अविद्या, अहंकार नष्ट होता है, जिससे आध्यात्मिक ज्ञान का विमल प्रकाश प्राप्त होता है । *स्वर्वेद*  में सेवा, सत्संग एवं साधना की त्रिवेणी है । ज्ञान, वैराग्य, भक्ति का यथार्थ है । *स्वर्वेद*  के यथार्थ ज्ञान से ही अविद्या-अज्ञानता नष्ट हो सकती है, ब्रह्मविद्या की ज्योति प्रकाशित हो सकती है, क्योंकि *स्वर्वेद*  की विषयवस्तु ब्रह्मविद्या ही है । ब्रह्मविद्या विहंगम योग का व्यापक प्रचार हो इसलिए इसके प्रणेता अनन्त श्री सदगुरू महर्षि सदाफलदेव जी भगवान ने इस महान सद्ग्रन्थ का सृजन किया है ।
–पूज्य सद्गुरु उत्तराधिकारी श्री विज्ञानदेव जी महाराज ।