*स्वर्वेद* मानव जाति के उत्थान का आध्यात्मिक सद्ग्रन्थ है । इसके शब्द शब्द में अदभुत चमत्कार भरा हुआ है । *स्वर्वेद* की वाणी अमोघ है । ये वाणी साक्षात्कृतधर्मा ऋषि की वाणी है, ब्रह्मवाणी है, दिव्यवाणी है, अमृतवाणी है । इसके श्रवण मात्र से शुभ संस्कारों का उदय होता है, अशुभ संस्कार नष्ट होते हैं । विवेक जागृत रहता है । अविद्या, अहंकार नष्ट होता है, जिससे आध्यात्मिक ज्ञान का विमल प्रकाश प्राप्त होता है । *स्वर्वेद* में सेवा, सत्संग एवं साधना की त्रिवेणी है । ज्ञान, वैराग्य, भक्ति का यथार्थ है । *स्वर्वेद* के यथार्थ ज्ञान से ही अविद्या-अज्ञानता नष्ट हो सकती है, ब्रह्मविद्या की ज्योति प्रकाशित हो सकती है, क्योंकि *स्वर्वेद* की विषयवस्तु ब्रह्मविद्या ही है । ब्रह्मविद्या विहंगम योग का व्यापक प्रचार हो इसलिए इसके प्रणेता अनन्त श्री सदगुरू महर्षि सदाफलदेव जी भगवान ने इस महान सद्ग्रन्थ का सृजन किया है ।
–पूज्य सद्गुरु उत्तराधिकारी श्री विज्ञानदेव जी महाराज ।
Sunday, August 25, 2019
स्वर्वेद:विश्व का अद्वितीय आध्यात्मिक सद्ग्रन्थ
Sunday, May 5, 2019
भगवान श्री राम
मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम जी ने पारिवारिक, राजनैतिक, सामाजिक, चारित्रिक -------उच्चतम मर्यादाओं को कायम किया, वे आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी कि उस काल में थीं । वर्तमान काल में जिस प्रकार की परिस्थितियां निर्मित हुई हैं, उसमें तो इनकी अत्यधिक आवश्यकता है । आज सम्पूर्ण विश्व के मानव को श्री राम जैसी चरित्रबल की आवश्यकता है । हम रामनवमी त्योहार के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं, राम कथा पर आधारित राम चरित मानस का पाठ भी कर लेते हैं, रामलीला का मंचन भी करते हैं, परन्तु राम ने जिन उच्चतम मर्यादाओं को कायम किया है, उनको अपने जीवन में उतारने का प्रयास नहीं करते हैं ।
इसके लिए आवश्यक है, आत्मबोध की, परमात्म बोध की । इसके बगैर यह सब असम्भव है ।
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